’बांग्लादेश: शरणार्थी बनी शेख हसीना’ ’’’’’’’’’’’’’’’’’’’’
(राकेश अचल) बांग्लादेश में तख्ता पलट न अप्रत्याशित है और न इसे टाला जा सकता था, क्योंकि जिस तरह से प्रधानमंत्री शेख हसीना देश को चला रहीं थीं उसका हासिल यही होना था। शेख हसीना अपने मुल्क में तख्ता पलट होते ही पद से इस्तीफा देकर शरणार्थी बन गयीं हैं, लेकिन बांग्लादेश की आग की जलन आस-पड़ौस में भी महसूस की जा रही है। 53 साल के बांग्लादेश को ये दिन क्यों देखना पड़ रहे हैं इसका विश्लेषण अब बहुत जरूरी हो गया है। आज से 53 साल पहले 1971 में बांग्लादेश जिन परिस्थितियों में बना था तब से अब तक बहुत कुछ बदला है। भारत ने 6 दिसंबर, 1971 को बांग्लादेश को एक स्वतंत्र देश के तौर पर मान्यता दी थी, हालांकि तब वह पाकिस्तान का पूर्वी हिस्सा था, कोई 10 दिन बाद बांग्लादेश को पूर्ण आजादी तब मिली थी जब पाकिस्तान की सेना ने भारत की सेना के सामने हथियार डाल दिए थे। बांग्लादेश स्वाभाविक रूप से भारत का मित्र है और पिछले 53 साल में तमाम उठपटक के बावजूद भारत और बांग्लादेश में अपवादों को छोड़कर कभी अनबन नहीं हुई। जानकार कहते हैं कि दक्षिण एशिया के देशों में बांग्लादेश के सबसे करीबी संबंध भारत के साथ ही हैं। सिर्फ ...